क्रिया की परिभाषा तथा अकर्मक व सकर्मक क्रिया के भेद व उदाहरण

क्रिया की परिभाषा :-

जिस शब्द से किसी काम का करना अथवा होना पाया जाए, उसे क्रिया कहते हैं
जैसे - ❍ राम दौड़ता है |
❍ सीता सोती है |
❍ रामेश कूद रहा है |
इन वाक्यों में "दौड़ता है", "सोती हैं "और "कूद रहा हैं" क्रिया के बोधक है और इनसे किसी न किसी कार्य के होने का बोध हो रहा हैं। क्रिया का निर्माण "धातु" से होता है|
जैसे - खाना, पीना ,पढ़ना ,लिखना, सोना, हँसना, बैठना ,झुकना |
हिंदी में मूल धातु का निर्माण संज्ञा और विशेषण से भी होता हैं ।
संज्ञा - हाथ से हथियाना,फटकार से फटकारना ।
विशेषण - मोटा से मुटाना,गरम से गरमाना ।

कर्म के आधार पर क्रिया के मुख्य दो भेद होते हैं -
(A) अकर्मक क्रिया
(B) सकर्मक क्रिया

(A) अकर्मक क्रिया :-

जिस क्रिया के साथ कर्म प्रयुक्त न हो तथा क्रिया का व्यापार और फल दोनो कर्ता पर ही पड़े अर्थात कार्य का होना ज्ञात हो उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं ।
❍ सीता सोती है |
❍ राम दौड़ता है |
❍ पेड़ से पत्ता गिरता है |
Note : इनमें कोई कर्म नहीं हैं ।
अकर्मक क्रिया दो भेद होते हैं -
1.पूर्ण अकर्मक क्रिया
2.अपूर्ण अकर्मक क्रिया

(B) सकर्मक क्रिया :-

जिन क्रियाओ के व्यापार या कार्य का फल कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़ता हैं उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं ।
❍ राजेश पुस्तक पढ़ता हैं
❍ राम दूध पीता हैं
पहले वाक्य में "पढ़ता है" क्रिया का फल "पुस्तक" पर पड़ रहा हैं इसलिए "पुस्तक" कर्म हैं और "पढ़ता हैं" सकर्मक क्रिया हैं ।
दूसरे वाक्य में "पीता है" क्रिया का फल "दूध" पर पड़ रहा हैं इसलिए "दूध" कर्म हैं और "पीता है" सकर्मक क्रिया हैं ।
इसी प्रकार देखना, सुनना,खेलना,बुलाना,आना,जाना,बेचना,लिखना आदि सकर्मक क्रिया हैं ।

सकर्मक क्रिया तीन भेद होते हैं -
1. पूर्ण एककर्मक क्रियाएँ
2. पूर्ण द्विकर्मक क्रियाएँ
3. अपूर्ण सकर्मक क्रियाएँ

Note : अकर्मक और सकर्मक क्रियाओं को पहचानने का सबसे सरल तरीका यह है कि क्रिया के पहले क्या अथवा किसको लगाकर देखा जाए । यदि उत्तर में कुछ आये तो क्रिया सकर्मक होगी और उत्तर में कुछ भी न आए तो क्रिया अकर्मक होगी।


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