लैंगिक जनन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

लैंगिक जनन से संबंधित प्रश्न :-
1. मनुष्य में लैंगिक जनन
2. परागण
3. एक लिंगी पुष्प व उभय लिंगी पुष्प
4. किशोरावस्था अथवा यौवनारंभ
5. पराग कणों का अंकुरण

मनुष्य में लैंगिक जनन को समझाइए

Answer :- मनुष्य पैदा होते ही जनन क्रिया करने में सक्षम नहीं होता है क्योंकि जनन क्रिया के लिए शारीरिक और मानसिक विकास की आवश्यकता होती है 10 से 12 वर्ष की उम्र तक शारीरिक व मानसिक विकास की वृद्धि तेजी से होती है उसके बाद शारीरिक व मानसिक विकास वृद्धि रुक जाती है व शरीर में उपस्थित अलग-अलग ग्रंथियों से अलग-अलग हार्मोन स्रावित होता है जिससे जननांगों का विकास होता है उसके बाद ही व्यक्ति जनन करने में सक्षम होता है ।


परागण किसे कहते हैं ? समझाइए

Answer :- परागण पराग कणों का पुष्प की वृतिकाग्र तक पहुंचाना परागकण कहलाता हैं
यह दो प्रकार के होते हैं -
1. स्वपरागण
2. पर परागण

1. स्वपरागण :- पराग कण उसी पुष्प की वृतिका ग्रह या उसी पौधे के अन्य पुष्प के वृतिकाग्र तक पहुंचते हैं जिसे स्वपरागण कहते हैं ।

2. पर परागण :- पराग कणों का किसी अन्य पौधे के पुष्प की वृतिकाग्र तक पहुंचना , उसे पर परागण कहते हैं ।

एक लिंगी पुष्प व उभय लिंगी पुष्प किसे कहते हैं ?

Answer :-
1. एक लिंगी पुष्प :- जिस पुष्प में स्त्रीकेशर व पुकेंशर में से एक ही जननांग उपस्थित होता है उसे एक लिंगी पुष्प कहते हैं ।
जैसे - तरबूज व पपीता ।

2. उभय लिंगी पुष्प :- जिस पुष्प में स्त्रीकेशर व पुकेंशर दोनों जननांग उपस्थित होते हैं उसे उभयलिंगी पुष्प कहते हैं
जैसे - सरसों

किशोरावस्था अथवा यौवनारंभ किसे कहते हैं ?

Answer :- मनुष्य की वह अवस्था जिसमें जननांगों का विकास तीव्र गति से होता है और अनेक शारीरिक व मानसिक परिवर्तन दिखाई देते हैं वह अवस्था किशोरावस्था अथवा यौवनारंभ कहलाती हैं ।

पराग कणों के अंकुरण को समझाइए


वर्तिकाग्र पर परागकणो का अंकुरण

Answer :- पराग कण पुष्प की वृतिकाग्र तक पहुंचते हैं यहां पर पोषण प्रदान करके कोशिकाओं में वृद्धि करते हैं जिससे एक पराग नली व दो नर युग्मक का निर्माण होता है पराग नली अंडाशय में उपस्थित बीजाणु , बीजाणु में उपस्थित अंडकोशिका तक चली जाती है पराग नली नर युग्मक को अंड कोशिका तक लाने का कार्य करता है आंड कोशिका में उपस्थित मादा युग्मक से नर युग्मक क्रिया करते हैं जिसे निषेचन कहते हैं निषेचन के दौरान भूर्ण का निर्माण होता है और अंडाशय से फल , बीजाणु से बीज व भूर्ण से नवोदभिद और एक संपूर्ण पादप का निर्माण होता है




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